Zindagi ki kashti

, Poems

एक राह ने मंज़िल से मिला दिया
अपनों की कश्ती ने बेगानो से मिला दिया
मंज़िल तो आज भी दूर है, ऐ दोस्त
ज़िद्द ने हमारी मगर हमें मुसाफ़िर बना दिया |

आग जो भड़की थी सालो पहले
दोस्तों की ठोकर ने उसे शोला बना दिया
जुनून तो हममें भी कम नहीं है
चाहत ने मेरी मगर मुझे ठहरना सीखा दिया |

लहरें तो है दिल में तूफ़ान जैसी
ज़िन्दगी ने पर आज सागर से मिला दिया
सितारे तो हम भी चूमेंगे एक दिन
जज़्बे ने आज मेरे मुझे यकीन दिला दिया |

ज़माने का तो काम ही है हँसना
पर हौसलों ने हमारे हमें भी उड़ना सीखा दिया
धोखे थे वो जो पीछे छूट गए
हिम्मत ने हमारी हमे फिर से चलना सीखा दिया |