Zindagi ki kashti

, Poems
एक राह ने मंज़िल से मिला दिया अपनों की कश्ती ने बेगानो से मिला दिया मंज़िल तो आज भी दूर है, ऐ दोस्त ज़िद्द ने हमारी मगर हमें मुसाफ़िर बना दिया |

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