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Read stories of new book published on Onlinegatha कांटा लगा  written by Jitendra Jeetu. 

इधर कुछ समय से कांटे की पौ-बारह है। वह सुंदियों के पैरो में लग रहा है, उनकी मांओं के पैरों में लग रहा है और उनकी भी मांओं के पैरों में लग रहा है। पैरों में ही नहीं, वह हथेलियों से, हृदयस्थलियों तक में जा लगा है। कांटा यूं तो होता ही लगने की चीज है लेकिन इतने विशाल पैमाने पर जा लगेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।