Dosti ka sabab

, OG Writings

यह दोस्ती भी कमाल चीज़ होती है, किसी से निभाई नहीं जाती तो किसी से संभाली नहीं जाती है |  वो दोस्त ही क्या ऐ दोस्त! जो अधर में साथ छोड़ जाए, सुन ज़माने के ताने तुमसे ही मुख मोड़ जाए | दोस्ती तो वो रिश्ता है, जो ज़माने से लड़ जाए, निभाने को साथ दोस्त का बगावत का रूप बन जाए | सुख हो या दुःख, गम हो या खुशी, दोस्त साथ नहीं छोड़ा करते, गर्दिश में कभी तन्हा नहीं छोड़ा करते | चेहरा देख के जो दिल भाप ले, आँखे देख जो राज़ जान ले, सुन कर बहाने और कठोर वचन भी, जो सच बतलाने की ज़िद थाम ले, सच्चा दोस्त वही है, बाकि सब तो धोखे है ज़माने के |

देखा है हमने भी, बहुत लोगों को दोस्ती की आड़ ले मतलब निकालते हुए, कभी मज़ाक बना हस्ते तो कभी मेरे दर्द पर मुस्कुराते हुए |  बहुत लोगों ने छोड़ा है साथ  औरो से रिश्ता निभाने के लिए, सुना तो देते थे अपनी पर मेरी कही बाते सबब बन जाती थी मुझे ही नीचा दिखने में | कभी-कभी, मैं सोच में पड़ जाती हूँ, क्या इन लोगो को कद्र नहीं मेरी दोस्ती की,मोल नहीं मेरे एहसासो का या मैंने ही दोस्ती निभाने में अपना वज़ूद खो दिया | किसी ने कहा था मुझसे कि सब दोस्त एक से नहीं होते है, सबको नापने के तराजू अलग होते है | खुमारी थी वो मेरी दोस्ती और दोस्तों पर ऐतबार करने की कि यह बात तब समझ नहीं आई | हँसी आती है आज खुद पर सबसे आईने सी पारदर्शिता रखी क्यों, भूल गई थी हद होती है रिश्तों में झुकते जाने की