Author Review for Onlinegatha

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Dr. Manoj Srivastava –

मुझे अपने मित्रों को यह सूचना देते हुए हर्ष हो रहा है कि ख्यातिलब्ध प्रकाशक Online Gatha ने मेरी एक इ-बुक प्रकाशित की है। यह इ-बुक तीन नाटकों का एक संग्रह है जिसमें ‘अदमहा’, ‘दामाद की लाश’ और ‘पराजित स्वर्ग’ नामक नाटक हैं। इस संग़्रह का शीर्षक अदमहा है। मित्रों से निवेदन है कि वे इस संग्रह को Online Gatha वेबसाइट पर अवश्य पढ़ें।
मुझे बताते हुए बेहद अफ़सोस हो रहा है कि इस समय नामचीन राष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ़ हंसोढ़ किस्म के बेहद सहती नाटक मंचित किए जा रहे हैं। मंचीय कलाकारों और निदेशकों एकमात्र लक्ष्य पैसा बनाना है। वल्गैरिटी के कारण वे नाटक न तो अपना समाज-धर्म निभा पा रहे हैं, न ही साहित्य में उनका कोई हस्तक्षेप है। मैंने 11 जुलाई, 2012 को बेगूसराय के दिनकर भवन अपने संक्षिप्त भाषण में मौज़ूदा दौर में लिखे जा रहे हिंदी नाट्य विधा के हत भाग्य पर दर्शकों और पाठकों का ध्यान आकर्षित किया था। प्रकाशकों के पास नाटक प्रकाशनार्थ ले जाइए तो वे जिस तरह कविताओं को प्रकाशित करने के प्रस्ताव पर मुंह बिचकाते हैं, उसी तरह नाटकों के संग्रह को देखकर भी घड़ों आँसू बहाते हैं। उल्लेख्य है कि आज मंचों के अभाव और दर्शकों की उदासीनता के कारण नाट्य विधा उपेक्षित होती जा रही है जिसका प्रत्यक्ष कारण है–अच्छे और सामाजिक नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं। अच्छे नाटककार इसलिए नाट्य लेखन से तौबा कर रहे हैं क्योंकि प्रकाशक उनके नाटकों को प्रकाशित करने से एक सिरे से नकार जाते हैं। मैं बताना चाहता हूँ–पाठकों/दर्शकों और प्रकाशकों को भी, कि अगर नाटक पढ़े भी जाएं तो वे कहानी/उपन्यास से कहीं अधिक दिलचस्प होते हैं। एक सफल नाटक एक समाज का समग्र मनोविज्ञान होता है।