‘‘हीरो मेरी कहानी मेरे अनुभव’’ एक लेखक की संघर्षपूर्ण आत्मकथा. . . .

‘‘हीरो मेरी कहानी मेरे अनुभव’’ एक लेखक की संघर्षपूर्ण आत्मकथा. . . .

‘‘हीरो’’ मेरी कहानी मेरे अनुभव पी. के. श्रीवास्तव द्वारा लिखित उन्हीं के जीवन पर आधारित कहानी है। पी. के. जी ने अपने जीवन में घटित घटनाओं को इस पुस्तक में कहानियों का रूप दिया है अथवा दूसरे शब्दों में बोलें तो उन्होंने सत्य घटनाओं को अपने पुस्तक के पन्नों में बहुत ही सुन्दरता से उतारा है। इसमें लेखक ने आम आदमी के जीवन के बारे में बताने की चेष्टा की है कि कैसे व्यक्ति अपने जीवन की परेशानियों से जूझता है और उस परिस्थिति का सामना करता है। एक प्रकार से देखा जाए तो वह भी एक हीरो है। रील लाइफ का हीरो ही नहीं बल्कि रियल लाइफ का हीरो, जो कभी भी हार नहीं मानता भले ही परिस्थितियां कैसी भी हो। वह अपने हालात से लड़ता है और लड़ता ही रहता है।

हीरो (नायक) एक ऐसा शब्द है जिसको सुनकर हम अपने मन में हीरो की एक अलग ही कल्पना करने लगते हैं। हर प्रतिभाशाली, नेक दिल एवं गुणवान व्यक्ति एक हीरो है, ऐसा हम समझने लगते हैं। उसमें अनेकों खूबियाँ होती हैं। वह एक ऐसा आदर्श व्यक्ति होता है जो हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होता है क्योंकि हमारे मन में फिल्मों के हीरो की तस्वीर इस प्रकार की ही होती है। यदि विचार किया जाए तो हर आम आदमी हीरो है, क्योंकि वह अपने जीवनकाल में हर परिस्थिति का सामना करते हुए अपने दायित्वों का निर्वाह करता है। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ-साथ समाज के दायित्वों को भी निभाता है। जैसे एक सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही हर इंसान के जीवन में कभी सुख तो कभी दुःख आते ही रहते हैं बस अंतर इतना होता है कि किसी के जीवन में दुःख ज्यादा होता है तो किसी के जीवन में कम किन्तु हमें कभी अपनी कठिनाइयों से डरकर हार नहीं मानना चाहिए। बल्कि उस समस्या से लड़ना चाहिए। यही लेखक का उद्देश्य है। अगर आपने अपनी कठिनाइयों के ऊपर जीत हासिल कर ली तो समझिये आप सही मायनों में एक सच्चे ‘‘हीरो’’ हैं।

हर वो इंसान हीरो है जो परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकता, हर हालात का सामना करते हुए जीवन-यापन करता है। जन्म से मृत्यु तक जीवन का हर पल पूर्व निर्धारित है। जीवन कैसे चलेगा, क्या-क्या घटित होगा और कैसे अन्त होगा? ये किसी को पता नहीं, इसका न धर्म से, न कर्म से और न पूजा-पाठ से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं, सबका अपना-अपना भाग्य।

इस पुस्तक में पी. के. श्रीवास्तव जी ने अपने जज़्बात, खुशी, दर्द, परेशानियां और अपनी सोच का समावेश किया है। एक आम आदमी अपने जीवन में क्या-क्या झेलता है? जन्म से मृत्यु का सफर वह कैसे तय करता है? वह हालातों का मुकाबला कैसे करता है और जीवन के अन्तिम पड़ाव पर उसके पास क्या होता है, शायद कुछ खट्टी, कुछ मीठी, कुछ सुनहरी और कुछ दर्द भरी यादें। सिर्फ एक मुट्ठी यादों के साथ उसके सफर का अन्त होता है। उस समय वह नितान्त अकेला, बेबस, लाचार और शक्तिहीन होता है।

प्रस्तुत पुस्तक ‘‘हीरो’’ मेरी कहानी मेरे अनुभव में लेखक श्री पी. के. श्रीवास्तव जी ने कई कहानियों का समावेश किया है जैसे माँ, संगीत टीस, मेढ़कों की मण्डी, नज़र-बट्टू आदि कहानियों को लिखा है। इनकी कहानियों के नाम जितने सुनने में आकर्षित लगते हैं, उतनी ही पढ़ने में भी। इनकी इस पुस्तक में कुल 110  कहानियां हैं। इन्होंने अपनी इस पुस्तक के जरिए उन्होंने यह भी बताया है कि किस प्रकार इनकी 17 वर्ष की पुत्री की मृत्यु हो जाती है और अपनी बेटी के दुःख में इनकी पत्नी भी मौत को गले लगा लेती हैं। लखनऊ के डॉक्टरों के द्वारा हुई लापरवाही के कारण अपनी पत्नी तथा जान से प्यारी बेटी को वे खो देते हैं।

प्रमोद कुमार (पी . के . श्रीवास्तव) जी ने वक्त की चिंगारियों की रोशनी के उजाले में ज़िंदगी का सफर तय किया। कभी दर्द ने रास्ता दिखाया, तो कभी आँसुओं ने ग़म को ठण्डा किया और कभी आह ने दिल को सुकून पहुँचाया। हर हाल में ज़िंदगी जीने की सीख इनके लेखन में मिलती है। वक़्त के थपेड़े इंसान को गिरा देते हैं और वक़्त के थपेड़े ही इंसान को उठाकर उसे रास्ता दिखाते हैं और मंजि़ल की तरफ ले जाते हैं, क्योंकि यह बात बिल्कुल सही है कि ठोकरें ही अंधेरों में इंसान को रास्ता दिखाती हैं। प्रमोद कुमार जी अपनी पुस्तक के द्वारा यही संदेश देना चाहते हैं कि हमें किसी भी परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका डटकर सामना करना चाहिए।

अपनों से जुदाई का ग़म जब बेबसी में बदलता है और जब इंसान आँसुओं की कमी के मुकाम पर पहुँचता है तो जुदाई का एहसास खत्म हो जाता है। फिर जुदा हुए लोग उसकी हर साँस में समा जाते हैं और हमसफर बनके साथ चलने लगते हैं। आगे जानने के लिए पढ़ें अपने ही संघर्षों से लड़ते-जूझते हुए प्रमोद कुमार श्रीवास्तव जी की आत्मकथा।

प्रमोद (पी . के . श्रीवास्तव) जी की लेखनी सबको नाकामियों और खराब हालात में मंज़िल पाने का सलीका सिखाती है और दुःख में भी कैसे सुख का अनुभव किया जाए, इसकी प्रेरणा देता है। अपने लेखन में इन्होंने अति सुन्दर साहित्यिक भाषा का प्रयोग किया है। साथ ही जीवन की बारीकियों की ओर भी ध्यान केंद्रित किया है। आपको यह पुस्तक ‘‘हीरो मेरी कहानी मेरे अनुभव’’ अवश्य पसंद आएगी।

यह पुस्तक “हीरो मेरी कहानी मेरे अनुभव”  आप ऑनलाइन गाथा की वेबसाइट www.onlinegatha.com या फिर amazon, flipkart व shopclues वेबसाइट से भी मँगवा सकते हैं या फिर ई-बुक डॉउनलोड करके भी पढ़ सकते हैं।

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