मन के भावों का शब्द रूपी चित्रण…”अभिव्यंजना”

मन के भावों का शब्द रूपी चित्रण…अभिव्यंजना”-

 

दिल को छू लेने वाले शब्द तो कई बार पढ़े होंगे पर जिस पुस्तक को एक झलक देखते ही मन भाव-विभोर हो जाए, ऐसी पुस्तक है… “अभिव्यंजना”। बीते वक्त की यादों में खोने को मजबूर करता कवर पेज और शब्दों व चित्रों का ऐसा सामंजस्य बिठाया है कि लगता ही नहीं तस्वीर शब्द बयां कर रही है या शब्द तस्वीरों को उकेर रहे हैं। मन के भावों का यह चित्रण, इसके शीर्षक को पूर्ण रूप से सार्थक करता है। गीता सैनी जी द्वारा लिखी इस पुस्तक “अभिव्यंजना” को प्रारूप देने के लिए प्रकाशन का कार्य ऑनलाइन गाथा पब्लिकेशन द्वारा किया गया है।  

 

अपनी माँ को समर्पित इस पुस्तक “अभिव्यंजना” के विषय में गीता जी कहती हैं कि, “कविता दिल की ज़मीन पर जन्म लेती है। जब दिल भावनाओं और कल्पनाओं की नाज़ुक डोर थामकर कभी आसमां की ऊँचाई में विचर रहा होता है या सागर की अथाह गहराई में दुनिया से बेपरवाह गोते लगा रहा होता है या पर्वतों, जंगलों और बर्फ के विस्तार में बेलगाम भटक रहा होता है, तब ज़िंदगी के सुंदर लम्हें शब्दों के रूप में कविता बनकर दिल की ज़मीन पर जन्म लेते हैं”।

गीता सैनी जी ने अपना जीवन बच्चों को एक अंग्रेज़ी साहित्य की शिक्षिका के रूप में अर्पित किया है। गीता जी के लेख एवं कविताएँ लखनऊ से प्रकाशित होने वाले प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र “दी टाईम्स ऑफ इण्डिया” के एन आई ई (NIE & Newspaper in Education) एडिशन में नियमित छपते रहते हैं। इसके अतिरिक्त गीता जी ने सह लेखिका के रूप में कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए प्रकाशित अंग्रेजी विषय की एक पुस्तक “Interact in Better English” में भी अहम योगदान दिया है।

गीता जी ने जीवन को बहुत करीब से देखा-समझा है, उन्होंने अपने सुख-दुख को अपनी कविताओं में बखूबी व्यक्त किया है। उनके शब्द आँखों से दिल में उतरने में सक्षम हैं। आशा है पाठक अपने अनुभवों और जज़्बातों को इन कविताओं की पंक्तियों से जोड़ कर देख पाएंगे, गीता के शब्द उनके मर्म को छू पाएंगे। उम्मीद करते हैं कि सभी पाठक गीता जी के इस पहले प्रयास का स्वागत खुली बाँहों से कर पाएंगे।

यह पुस्तक “अभिव्यंजना” आप ऑनलाइन गाथा की वेबसाइट www.onlinegatha.com या फिर amazon, flipkart व shopclues वेबसाइट से भी मँगवा सकते हैं या फिर ई-बुक डॉउनलोड करके भी पढ़ सकते हैं।

 

पुस्तक- अभिव्यंजना..(दिल की बातें)

लेखक- गीता सैनी

मूल्य- 80 रुपये

प्रकाशन- ऑनलाइन गाथा पब्लिकेशन