नीरज के साहित्यिक सफ़र की गाथा है… “गीतों के दरवेश”

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नीरज के साहित्यिक सफ़र की गाथा है… “गीतों के दरवेश”-

 

“बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार, लेना होगा जन्म हमें कई-कई बार”… इस मधुर गीत की धुन जहां एस.डी.बर्मन की याद दिलाती है तो वहीं इसके पावन बोल गोपाल दास सक्सेना उर्फ ‘नीरज’ की कविताओं में खोने को मजबूर करते हैं। नीरज द्वारा लिखी गई कविताएँ उनकी लेखन शैली का परिचय देती हैं। महान कवि नीरज के जीवन, साहित्य, संघर्ष और वैभव को दर्शाती पुस्तक है…“गीतों के दरवेश”। इस कॉफी टेबल बुक “गीतों के दरवेश” में नीरज की जीवनयात्रा और रचनात्मक योगदान के मूल्यांकन को रूपल अग्रवाल व हर्षवर्धन अग्रवाल ने बड़े ही मोहक अंदाज़ में सहेजा है। नीरज ने स्वयं इस पुस्तक को स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी को समर्पित किया है।

इस कॉफी टेबल बुक में साहित्य जगत के दिग्गज लेखकों ने नीरज पर लिखा है। हिंदी साहित्य में नीरज का योगदान बतौर कवि व लेखक रहा है। उनके इस योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा सन् 1991 में पद्मश्री व साल 2007 में पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया है। नीरज द्वारा लिखी गई कविताओं, शायरी व हिंदी सिनेमा के गीतों ने केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया है। यह किताब “गीतों के दरवेश” उभरते हुए युवा कवियों के लिए न केवल प्रेरणा का स्रोत बनेगी बल्कि उनके मार्गदर्शन का भी कार्य करेगी।

हिंदी साहित्य के कवियों में नीरज का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनके गीतों की पंक्तियां लगभग सभी पीढ़ी के लोग गुनगुनाया करते हैं। कवि सम्मेलनों के ज़रिए वह हर घर के शायर बन गए। नीरज सुख-दुख, अवसाद, मिलन-विछोह की भावनाओं के गीतकार रहे हैं। उनके संग्रह में हर किसी के मन को छूने वाले गीत हैं। समय के साथ वे दार्शनिक-आध्यात्मिक भाव के कवि बनते गए। इस पुस्तक में जीवन के इन सभी पायदानों को फोटोग्राफ्स के माध्यम से बेहद ख़ूबसूरती के साथ उभारा गया है।

नीरज के योगदान को भुलाना नामुमकिन है। लेकिन नीरज को अपनी इस मंज़िल तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करने पड़े। उन्होंने कभी टाइपिस्ट,  सिनेमा हॉल में गेटकीपर तो कभी अध्यापक के तौर पर भी अपनी जीवन गुज़ारा। इस पुस्तक में नीरज ने अपने जीवन, बचपन, कविताओं के दौर की शुरुआत, रोजगार, क्रांतिकारियों से परिचय, पहली नौकरी, सरकारी सेवा, मुसीबतों, फुटकर नौकरियों, फिल्मी दुनिया के अनुभवों, डाकू मानसिंह से मुलाकात, मुलायम सिंह यादव से संपर्क, मंत्री पद के ठाट-बाट, ज्योतिष सिद्धि, चुनाव लड़ने के अनुभव और यहां तक कि अपने प्रेम तक के बारे में विस्तार से खुलासा किया है। नीरज पाठ्यक्रमों के कवि भले नहीं माने गए लेकिन प्रारंभिक कक्षाओं के पाठ्यक्रमों में उनके गीत मिलते हैं।

पुस्तक में शामिल लेखकों में कुछ तो उनके मंचों के साथी  रहे हैं तो कुछ ऐसे लोग हैं जो छंदों की महिमा और कविता के लिए नीरज के अवदान को बखूबी समझते हैं। इस पुस्तक का विमोचन सदी के महानायक श्री अमिताभ बच्चन जी द्वारा किया गया एवं इसका प्रकाशन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरीटेबल ट्रस्ट के ज़रिए हुआ। इस पुस्तक के भीतर नीरज और उनके परिवेश की अनूठी छवियां अंकित हैं, जो उनके फैंस को खासतौर पर पसंद आएंगी।

 

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