तलाश

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मंज़िल तक पंहुचा दे जो

ऐसी राह की तलाश है

राहगीर तो बहुत मिलते है

राह में बने हमसफ़र की तलाश है

 

छू ले दिल को जो नज़रों से

ऐसी निगाहों की तलाश है

जुनून से कम ना हो जिसका वज़ूद

ऐसे पागल कारवे की तलाश है

 

सपने तो बहुत से पिरोये है

संजोय हुए सच की तलाश है

सुन तो लेते है लोग ज़ुबान को

दिल सुन ले जो उस दोस्त की तलाश है

 

जज़्बे तो मेरे किसीसे कम नहीं है

अब सच होते सपने की तलाश है

मुक़ाम तो पा लेते है लोग

मुझे मुक़म्मल जहाँ की तलाश है