जीवन का यही सार है

, Poems

यही जीवन है की

ज़िन्दगी की धुंध में हम यूँ खो जाये

किसी पल की नई सुबह

तो किसीका डूबता अँधियारा बन जाये

 

शामे और आएगी

संग अपने नई सुबह के नए रंग लाएगी

जितने पल मिले मुस्कुरा के समेट लो

गुज़रे पल में गम से ज़्यादा खुशियाँ बटोर लो

 

ज़िन्दगी हर रंग से गुलज़ार है

खुशियाँ चाहो या गम सबके पहाड़ है

आकाश में मोतियों की बहार है

जज़्बों से भरे सपने सब साकार है

 

नज़रो की भूलभुलैया में छुपा संसार है

कभी हाथ मिलते है तो कभी बंधन छूट जाते है

फूल खिल के फिर मुरझा जाते है

नई कलियों में फिर भी रस की फुहार है

 

दो रास्तो में सिमटा जीवन सार है

एक पल चले तो दूसरे को याद करना ही संसार है

यादों में खुशियाँ भरे या गम

यह सब दिमाग का मायाजाल है